मनीष पॉल को नहीं टाइपकास्ट जैसे शब्द में यकीन, मैं वही करता हूं जो मुझे...
टेलीविजन मेजबान और अभिनेता मनीष पॉल का कहना है कि उन्हें टाइपकास्ट शब्द पर यकीन नहीं है। उन्हें जो भी काम मिलता है, उसमें वह अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति देते हैं। मनीष ने कहा, 'मैं टाइपकास्ट शब्द पर यकीन नहीं करता, जो कोई भी टाइपकास्ट करना चाहता है, वह स्वतंत्र महसूस कर सकता है। हम एक लोकतंत्र में हैं, लेकिन मैं वही करता हूं, जो मुझे पसंद आता है। इसलिए होस्टिंग अपनी जगह है, अब 'व्हाट इफ' अपनी जगह है। मैंने 'ब्लैक ब्रीफकेस' नाम की एक फिल्म की, जो पूरी थ्रिलर थी। मैंने 'मिक्की वायरस' नाम की एक फिल्म भी की थी, जो एक कॉमिक थ्रिलर थी।'
उन्होंने आगे कहा, यह फिल्म 'व्हाट इफ' एक थ्रिलर फिल्म है। यानी अलग-अलग श्रेणी अलग गेम। जो भी काम मेरे पास आता है, मैं बस अपना सर्वश्रेष्ठ देता हूं। स्क्रीन पर अपनी समझदारी और हास्य के लिए लोकप्रिय मनीष को हाल ही 'व्हाट इफ' में देखा गया, जो एक फोन पर शूट की गई लघु फिल्म थी। फिल्म का सह-निर्देशन कार्तिक सिंह और मनीष ने किया है। जिसकी कहानी लॉकडाउन के समय के इर्द-गिर्द घूमती है।
हाल ही में मनीष ने 40 ऐसे श्रमिकों की मदद की है। उनके घर पर काम करने वाले एक स्टाफ के संपर्क में थे। मनीष के घर में काम करने वाले स्टाफ को भी अपने गांव जाना था। मनीष के जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने उन सभी को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली। मनीष ने इन 40 लोगों घर पहुंचाने के लिए अभिनेता सोनू सूद की मदद ली, जोकि पहले से ही कई हजार लोगों को उनके घर सुरक्षित पहुंचा चुके हैं। मनीष ने इन सभी मजदूरों को रवाना करते समय राशन सामग्री दी और रास्ते में उन्हें कोई तकलीफ ना हो, इसलिए उनकी आर्थिक मदद भी की।
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