www.republicbharat.info

जब धर्मेंद्र और जीनत अमान के इस गाने को सुन भड़क गईं थी महिलाएं, जमकर किया था विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली: साल 1977 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धरम वीर’ (Dharam Veer) आप सभी ने जरूर देखी होगी। इस फिल्म में फिल्म में धर्मेंद्र (Dharmendra), जितेंद्र (Jeetendra), जीनत अमान ( Zeenat Aman), नीतू सिंह ( Neetu Singh) और प्राण ( Pran) लीड रोल में थे। सभी ने इस फिल्म में अच्छा अभिनय किया था।

लेकिन इस फिल्म में धर्मेंद्र और जीनत अमान पर फिल्माए एक गाने ने बवाल खड़ा कर दिया था। जिससे डायरेक्टर मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) की नींद उड़ गई थी। दरअसल इस गाने को सुनकर महिलाएं भड़क गई थीं। जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर गाने में ऐसा क्या था कि जिसके कारण विरोध हुआ और गाने के बोल को बदलना पड़ा।

dharm_veer2.jpg

सालों बाद आज भी लोग इस फिल्म को देखना पसंद करते हैं। लेकिन इसके साथ ही इस फिल्म के गाने पर हुए महिलाओं का विरोध भी याद आ जाता है। दरअसल फिल्म धरम वीर का म्यूजिक एल्बम रिलीज होने के कुछ दिनों बाद महिला संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।

dharm_veer1.jpg

जिस गाने का विरोध महिलाओं द्वारा किया जा रहा था, वो गाना 'सात अजूबे इस दुनिया में' था। इस गाने के एक शब्द पर महिलाओं को आपत्ति थी। गाने के दूसरे अंतरे में आनंद बक्शी ने कुछ ऐसा लिख ने दिया था कि ये लड़की है या रेशम की डोर है। कितना गुस्सा है, कितनी मुंह जोर है। ढीला छोड़ न देना हंसके, रखना दोस्त लगामें कसके। मुश्किल से काबू में आए लड़की हो या घोड़ी..। इसी लाइन लड़की हो या घोड़ी.. को लेकर जमकर विवाद हुआ था।

dharm_veer3.jpg

गाने के इस लाइन में महिला की तुलना घोड़ी से की गई थी। जिसका महिला संगठनों ने जमकर विरोध किया था। विरोध बढ़ता हुआ देखकर डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने आनंद बक्शी से कहकर दूसरी लाइन लिखवाई और फिर से रिकॉर्ड और रिलीज किया था। इस गाने को धर्मेंद्र-जीनत, जितेंद्र नीतू सिंह पर फिल्माया गया था। गाने के लिए आवाज मोहम्मद रफी और मुकेश ने दी थी।

यह भी पढ़ें: जानिए कैसे जिंदगी ने नक्सलवाद में फंसे मिथुन चक्रवर्ती को बना दिया बॉलीवुड का डिस्को डांसर

dharm_veer4.jpg

https://ift.tt/3FanrzB

https://ift.tt/2YednVv

No comments